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दिल्ली की सर्दी और गेंदों के फूल

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सी पी रविकुमार 

टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स 

दिल्ली के एनएसआईटी के कैंपस में जाते ही पहले नज़र आते हैं फूल की क्यारियां। इनके अलावा मुख्य इमारत के सामने और विभागों के सामने गमलों में लगे हुये ढ़ेर सारे फूलों के पौधे। दिल्ली की सर्दी लोगों को  शायद न भाये, पर सर्दियों के दिनों में खूब मिलने वाले रेवाड़ी और गाजर का हलवा तो सबको अच्छा लगता है! सर्दी के दिनों की दोपहर की  धूप का आकर्षण तो वही जाने जिसने उसका अनुभव किया हो! सर्दियों के दिनों का एक और आकर्षण है रंगबिरंगे गेंदों के फूल! 

 पौधों में  जिस प्रकार गेंदों के फूलों को देख कर मुझे अच्छा लगा, उसी तरह मुझे आनंद हुआ उन विद्यार्थी और विद्यार्थिनियों को देख कर जो महीने भर के इंटर्नशिप प्रोग्राम में भाग लेने के लिये आये हैं और अनेक प्रकार की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। 

एनएसआईटी में स्थित "टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स सेंटर फॉर एम्बेडेड प्रॉडक्ट डिज़ाइन" (TI-CEPD)  के द्वारा यह दूसरा इंटर्नशिप प्रोग्राम है जो सर्दियों की छुट्टियों के दौरान आयोजित किया जा रहा है। २०१३ के गर्मियोंकी छुट्टियों में पहली बार जो कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसके बारे में मैंने एक ब्लॉग लिखा है, जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। २०१३ की सर्दियों में दूसरा इंटर्नशिप का ऐलान होने के कुछ ही दिनों में भारत के अनेक क्षेत्रों से आवेदन पत्र आने प्रारंभ हो गये। इलेक्ट्रानिक्स विभाग के अध्यापक प्रो तरुण रावत नें इन आवेदन पत्रों को छांटा और कुल २८ विद्यार्थियों को इंटर्नशिप के लिये  चुना। 

इंटर्नशिप के मुख्य आयोजक हैं प्रो धनंजय गद्रे, जो एनएसआईटी के इलेक्ट्रानिक्स विभाग में अध्यापक हैं और TI-CEPD के निर्देशक भी। सर्दियों का इंटर्नशिप दिसंबर ९ को प्रारंभ हुआ एक छोटे से उदघाटन समारोह के साथ, जिसमे उपस्थित थे एनएसआईटी के निर्देशक प्रो राज सेनानी, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के श्री दीपक भारद्वाज (जो निर्देशक हैं टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स - भारत के सरकारी रिश्तों के) और एनएसआईटी के कुछ अध्यापक। प्रो राज सेनानी और श्री दीपक भारद्वाज नें  TI-CEPD में जो अनुसंधान पहले संपन्न हो चुके हैं उनकी जांच की और विद्यार्थियों के परिश्रम की सलाहना की। प्रो गद्रे और उपस्थित दोनों वरिष्ठों  से  इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र में भारतीय संस्थायें क्या कर रहीं हैं और भारतीय विद्यार्थी क्या क्या उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं इसके बारे में विद्यार्थियों को जानकारी मिली। 

"मेरा यहाँ आने का उद्देश था इलेक्ट्रानिक्स में कुछ करने का! मैं अब इंजीनियरिंग की दूसरी साल में हूं।  जब मेरे साथी पहली साल में कुछ प्रॉजेक्ट करते हुये नज़र आते थे तो मुझे भी लगता कि मैं कुछ करूं ! यहाँ आ कर मेरा सपना साकार हो रहा है! मुझे इलेक्ट्रानिक्स में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है, और वह भी अपने हाथों से खुद करने के ज़रिये!" एनआईटी (ट्रिची) से आई हुई एक सहभागी विद्यार्थिनी ने कहा।  

"मुझे पहले ही दिन प्रेरणा मिली कि इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र में कितना कुछ किया जा सकता है!" डीटीयू से आये हुये एक सहभागी विद्यार्थी ने कहा। "प्रो गद्रे ने हमें बहुत व्यावहारिक बातें बताईं जो किताबों में मुश्किल से मिलती हैं! इलेक्ट्रोलायटिक केपासिटर कब इस्तेमाल किया जाये और सेरामिक केपासीटर कब - ऐसी बातों को सीख कर मेरा आत्मविशवास बढ़ रहा है!"

इंटर्नशिप में प्रो गद्रे की क्लास तो है ही, उसके अलावा हर सहभागी विद्यार्थी के लिये एक "मेंटर" भी है जो उस सहभागी को मदद देता है और उसको आगे की दिशा दिखाता है। ये मेंटर प्रो गद्रे के  विद्यार्थी हैं जो उनके साथ पहले काम कर चुके हैं। निधी शर्मा, जिसने गीकी अलार्म का  निर्माण किया, रोहित गुप्ता जिसने अनेक प्रॉजेक्ट बनाये, सार्थक गुप्ता जो टीवा लांच पैड के लिये एक मदरबोर्ड बनाने में लगा है। चिराग नागपाल पुणे में इंजीनियरिगं विद्यार्थी है जिसने गर्मी के दिनों में इंटर्नशिप कार्यक्रम में भाग लिया था और अब की बार वह एक मेंटर है! 

दिसंबर २० को इंटर्नशिप के सहभागियों, मेंटरों और अध्यापकों के साथ समय बिताने का मौका मुझे प्राप्त हुआ। हर एक सहभागी कुछ न कुछ प्रॉजेक्ट बनाने में जुटा हआ है और उस दिन सबके सामने आकर प्रॉजेक्ट के बारे में कुछ देर तक बोलने का अवसर उसे मिला। कोई इलेक्ट्रानिक विजिटिंग कार्ड बनाने की सोच रहा है तो कोई गेम! मुझे आश्चर्य (और आनंद) हुआ जब विद्यार्थियों ने बेझिजक अपने अनुभव बताये।  एक विद्यार्थी ने कम से कम  २० मिनट का लेक्चर दे डाला और मैंने उसे प्रोफेसर की उपाधि बक्श दी! मुझे लगा कि अध्यापक, मेंटर, और सहभागियों के बीच अच्छा मेलजोल बना हुआ है और बाहर से आये हुये विद्यार्थी नये माहौल में घुलमिल गयें हैं।  

सहभागी विद्यार्थियों के साथ एक बैठक - अन्य चित्रों को आप यहाँ देख सकते हैं  

 

यह इंटर्नशिप जनवरी ३, २०१४ को समाप्त होगा। अगला कार्यक्रम गर्मियों में (जून -जुलाई २०१४) में आयोजित किया जायेगा। हमारी आशा है कि न केवल विद्यार्थी बल्कि कुछ अध्यापक भी उसमे शामिल हों, जिससे आगे और भी विशेषज्ञों का निर्माण हो सके।  आप अगले इंटर्नशिप कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं तो प्रो तरुण रावत को लिख सकते हैं। 

* * *

जब मैं टैक्सी में बैठ कर कैंपस से निकला तो मेरी नज़र फिर से गेंदों के फूल पर पदि। मेरा मन भी उन फूलों की तरह मुस्कुरा रहा था। 


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